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philosophy - 3.2m posts

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  • जैसी नजर, वैसे नजारे – पूज्य बापू जी

    जगत तुम्हें आधिभौतिक दिखता है उसकी परवाह नहीं लेकिन देखने का नजरिया तुम आध्यात्मिक करो। एक वैज्ञानिक को पीपल का पेड़ दिखा, वह बोलेगाः ʹपीपल का पेड़ है। इसकी लकड़ियों में ऐसा है – ऐसा है, यह गुण है, यह दोष है। इसके फर्नीचर से ऐसे-ऐसे फायदे होंगे या यह होगा। इसके धुएँ से यह हो रहा है, यह होगा।ʹ वैज्ञानिक ने पीपल को लकड़ी समझकर उसका उपयोग किया। वैद्य को पीपल का पेड़ दिखेगा तो वह बोलेगा कि ʹइसमें पित्तशमन का सामर्थ्य है। इसके छोटे-छोटे पत्तों का – कोंपलों का मुरब्बा बनाकर रोज 10 ग्राम खायें तो कैसी भी गर्मी हो शांत हो जायेगी।ʹ वैद्य की दृष्टि है कि ʹपेड़ सात्त्विक है, इसमें अदभुत शक्तिवर्धक औषधीय गुण छुपे हैं।ʹ

    भक्त पीपल को देखता है तो कहता हैः ʹये तो पीपल देवता हैं। इनमें आधिदैविक स्वभाव के आत्मा भी वास करते हैं। ये तो नारायण का अभिव्यक्ति हैं।ʹ वह पीपल के पेड़ को धागा बाँधेगा, उसके चारों तरफ घूमेगा। ʹअच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारणभेषजात्। नश्यन्ति सकला रोगा सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।।ʹ

    करेगा और शनि देवता का पूजनादि करेगा। लेकिन तत्त्ववेत्ता बोलेगा कि ʹपंचभूतों और अष्टधा प्रकृति में चमचम चमकने वाला वही मेरा चैतन्य है। अगर चैतन्य नहीं होता तो पृथ्वी से रस कैसे लेता ? फल कैसे लगते ? फूल कैसे खिलते ? और सात्त्विक हवाएँ कैसे बनतीं ? ब्रह्म पीपल का पेड़ बनकर अपने-आपको पोषित करता है।ʹ

    वैज्ञानिक आधिभौतिक नजर से देखता है तो उसका उपयोग आधिभौतिक ही होता है। भक्त भगवदभाव से देखता है, नारायणरूप मानकर पीपल को फेरे फिरता है, जल चढ़ाता है। हम जब बच्चे थे तो पीपल की जड़ों को हरि ૐ….ૐ…, तू ही ૐ….ૐ…. करके चम्पी करते थे। बड़ा आनंद आता था। घर से जाते तब भी वहाँ पूजा करते, आते तब भी उसी मस्ती में, आनंद में रहते। तो हमारे अंतःकरण का निर्माण हुआ।

    भौतिकवादी को भौतिक फायदा होगा, आयुर्वेदवाले को औषधीय फायदा होगा, भगवदभाव वाले को अपना चित्त निर्माण होगा और तत्त्ववेत्ता अष्टधा प्रकृति के संगदोष से मुक्त अपने स्वरूप को ही देखेगा। अब तुम कौन-सा नजरिया अपनाते हो उस पर तुम्हारा भविष्य है। किसी को लगेगा कि गुरु हमारे ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं। किसी को लगेगा उपदेशक हैं। जिसका जैसा नजरिया होता है उस समय उसका चित्त भी वैसा ही बन जाता है और जैसा चित्त होता है वैसा ही दिखता है। इस प्रकार प्राणी-पदार्थों के प्रति अपना-अपना नजरिया है। अतः ऊँचा नजरिया करो, ऊँचे पद को पाओ।

    #philosophy #india
  • जैसी नजर, वैसे नजारे – पूज्य बापू जी

जगत तुम्हें आधिभौतिक दिखता है उसकी परवाह नहीं लेकिन देखने का नजरिया तुम आध्यात्मिक करो। एक वैज्ञानिक को पीपल का पेड़ दिखा, वह बोलेगाः ʹपीपल का पेड़ है। इसकी लकड़ियों में ऐसा है – ऐसा है, यह गुण है, यह दोष है। इसके फर्नीचर से ऐसे-ऐसे फायदे होंगे या यह होगा। इसके धुएँ से यह हो रहा है, यह होगा।ʹ वैज्ञानिक ने पीपल को लकड़ी समझकर उसका उपयोग किया। वैद्य को पीपल का पेड़ दिखेगा तो वह बोलेगा कि ʹइसमें पित्तशमन का सामर्थ्य है। इसके छोटे-छोटे पत्तों का – कोंपलों का मुरब्बा बनाकर रोज 10 ग्राम खायें तो कैसी भी गर्मी हो शांत हो जायेगी।ʹ वैद्य की दृष्टि है कि ʹपेड़ सात्त्विक है, इसमें अदभुत शक्तिवर्धक औषधीय गुण छुपे हैं।ʹ

भक्त पीपल को देखता है तो कहता हैः ʹये तो पीपल देवता हैं। इनमें आधिदैविक स्वभाव के आत्मा भी वास करते हैं। ये तो नारायण का अभिव्यक्ति हैं।ʹ वह पीपल के पेड़ को धागा बाँधेगा, उसके चारों तरफ घूमेगा। ʹअच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारणभेषजात्। नश्यन्ति सकला रोगा सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।।ʹ

करेगा और शनि देवता का पूजनादि करेगा। लेकिन तत्त्ववेत्ता बोलेगा कि ʹपंचभूतों और अष्टधा प्रकृति में चमचम चमकने वाला वही मेरा चैतन्य है। अगर चैतन्य नहीं होता तो पृथ्वी से रस कैसे लेता ? फल कैसे लगते ? फूल कैसे खिलते ? और सात्त्विक हवाएँ कैसे बनतीं ? ब्रह्म पीपल का पेड़ बनकर अपने-आपको पोषित करता है।ʹ

वैज्ञानिक आधिभौतिक नजर से देखता है तो उसका उपयोग आधिभौतिक ही होता है। भक्त भगवदभाव से देखता है, नारायणरूप मानकर पीपल को फेरे फिरता है, जल चढ़ाता है। हम जब बच्चे थे तो पीपल की जड़ों को हरि ૐ….ૐ…, तू ही ૐ….ૐ…. करके चम्पी करते थे। बड़ा आनंद आता था। घर से जाते तब भी वहाँ पूजा करते, आते तब भी उसी मस्ती में, आनंद में रहते। तो हमारे अंतःकरण का निर्माण हुआ।

भौतिकवादी को भौतिक फायदा होगा, आयुर्वेदवाले को औषधीय फायदा होगा, भगवदभाव वाले को अपना चित्त निर्माण होगा और तत्त्ववेत्ता अष्टधा प्रकृति के संगदोष से मुक्त अपने स्वरूप को ही देखेगा। अब तुम कौन-सा नजरिया अपनाते हो उस पर तुम्हारा भविष्य है। किसी को लगेगा कि गुरु हमारे ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं। किसी को लगेगा उपदेशक हैं। जिसका जैसा नजरिया होता है उस समय उसका चित्त भी वैसा ही बन जाता है और जैसा चित्त होता है वैसा ही दिखता है। इस प्रकार प्राणी-पदार्थों के प्रति अपना-अपना नजरिया है। अतः ऊँचा नजरिया करो, ऊँचे पद को पाओ।

#philosophy #india
  •  0  0 38 seconds ago
  •  1  0 3 minutes ago
  • Who You Are has very little to do with your life situation.
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  •  1  1 5 minutes ago
  • He’s going to be a singer, Happy Birthday Jaden! ♥️🎉🎁 @jessebusslal
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  •  14  9 9 minutes ago
  • ⚠️VOLUME UP⚠️
    I love this for so many reasons. We live in a time where extremism is easily accessible due to social media. So this post is for the Spiritual extremists, Food Choice Extremists, Religious Extremists, Motivational Speaking Quacks, Life Coach Quacks, Anti Ego Proselytizing, Energy, Vibrations people of the world. You are as “real” as the pseudo words you put together.😘
  • ⚠️VOLUME UP⚠️
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  •  10  1 10 minutes ago
  •  9  2 12 minutes ago
  • A friendly reminder that we are all in the process of #becoming ; don't let your future you be molded by the current you that's being driven by self-destructive patterns of behavior.
    We're all in this together, and collectively we can #breakthecycle and #overcome even the greatest of burdens that have been holding us back from becoming the best versions of ourselves for entirely to long.
  • A friendly reminder that we are all in the process of #becoming; don't let your future you be molded by the current you that's being driven by self-destructive patterns of behavior. 
We're all in this together, and collectively we can #breakthecycle and #overcome even the greatest of burdens that have been holding us back from becoming the best versions of ourselves for entirely to long.
  •  4  1 14 minutes ago